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पीआईडीपीआई पर केन्द्रीय सतर्कता आयोग के दिशानिर्देश
पीआईडीपीआई पर केन्द्रीय सतर्कता आयोग के दिशानिर्देश
साइक्लोथोन- 2017

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English

कार्य:
सतर्कता विभाग का मुख्य उद्देश्य‍ संगठन में भ्रष्टाचार एवं अनाचार को रोकने के लिए कदम उठाना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए किए जाने वाले प्रमुख कार्य निम्नानुसार हैं:

1. सभी वर्ग के कर्मचारियों/ट्रेवल एजेंसियों/हैंडलिंग एजेंसियों के विरुद्ध सतर्कता सबंधी शिकायतों की जांच करना।

2. ऐसे कर्मचारियों के विरुद्ध सतर्कता विभाग द्वारा सिफारिश की गई कार्रवाई की प्रगति मॉनी‍टर करना।

3. विभिन्न विभागों में अपनाए जा रहे सिस्टम एवं प्रक्रियाओं का अध्यन एवं जांच करना, भ्रष्टाचार संभावित क्षेत्रों की पहचान करना तथा भ्रष्टाचार अथवा अनाचार होने की संभावना को कम से कम करने के लिए उपचारात्चक उपायों का सुझाव देना।

4. संवेदनशील/भ्रष्टाचार संभावित क्षेत्रों में तैनात कर्मियों की निगरानी करना।

5. भ्रष्टाचार विरोधी उपायों पर कार्य योजना बनाना व उसका कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।

6. संवेदनशील तथा भ्रष्टाचार संभावित क्षेत्रों में औचक जांच की व्यवस्था एवं आयोजन करना।

7. जिन कर्मचारियों की सत्यषनिष्ठां संदेहास्पद हो, उनकी सूची तैयार करना।

8. जिन कर्मचारियों की सत्यषनिष्ठां संदेहास्पद हो, उनकी निगरानी करना।

9. सतर्कता मैनुअल में विशेष अध्यांय - “सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सतर्कता प्रबंधन” में दिए गए केन्द्रीय सतर्कता आयोग द्वारा जारी दिशानिर्देशों तथा समय-समय पर केन्द्रीय सतर्कता आयोग द्वारा जारी संशोधनों/परिपत्रों का कार्यान्वेयन। http://www.cvc.nic.in

10. सभी स्तरों पर सतर्कता मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना।

11. यह सुनिश्चित करना कि पूछताछ अधिकारी की नियुक्ति में विलंब न हो तथा आरोपी अधिकारी अथवा प्रज़ेनटिंग अधिकारी द्वारा टाल-मटोल करने की कार्यनीति न अपनाई जाए।

12. अनुशासनात्मक प्राधिकारी के अंतिम आदेशों हेतु पूछताछ अधिकारी की रिपोर्ट पर कार्रवाई उचित एवं शीघ्रता से पूरी की जानी सुनिश्चित की जाए।

13. मंत्रालय/विभाग के अधीनस्थ अनुशासनात्मक प्राधिकारियों द्वारा जारी अंतिम आदेशों की सूक्ष्म जांच इस उद्देश्य से की जानी चाहिए की कि समीक्षा किए गए मामले को पूरी तरह समझा गया है कि नहीं।

14. सीबीआई को सौंपे गए अथवा अपनी सूचना के आधार पर उनके द्वारा स्वयं आरंभ किए गए मामलों की जांच में सीबीआई को सहायता देना।

15. यह सुनिश्चित करना कि सक्षम अनुशासनात्मक प्राधिकारी सतर्कता मामलों की कार्रवाई में टालमटोल अथवा खानापूर्ति जैसा रवैया न अपनाएं तथा इस प्रकार संबंधित कर्मचारी/अधिकारी की जानबूझकर सहायता करना विशेषकर निकट भविष्य में सेवानिवृत्ति होने वाले अधिकारियों के मामलों में।

16. यह सुनिश्चित करना कि निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध मामले फाइल खो जाने आदि जैसे कारणों से समय सीमाबद्ध होने के कारण बंद न कर दिए जाएं तथा सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों के मामले में जारी आदेशों को समय पर कार्यान्वित किया जाना।